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जानिये शास्त्रों के अनुसार घर में तुलसी का पौधा लगाने के दस अनोखे फायदे

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हम सब जानते है तुलसी के पौधे को हमेशा हिन्दू आस्था का केंद्र माना गया है. घर की महिलाये सुबह स्नान के बाद सबसे पहले तुलसी को ही जल चढ़ाती है और उसकी पूजा करती है. आज हम आपको बताएँगे तुलसी की पौधे के बारे में शास्त्रों में कही गयी उन बातों के बारे में जिससे समस्त देवी-देवताओ की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी.

1) शास्त्रों के अनुसार तुलसी की पत्तियों को कुछ खास दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए. एकादशी, रविवार, सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण के वक़्त तुलसी की पत्तियों को नहीं तोड़ना चाहिए. यदि कोई व्यक्ति व्यर्थ में तुलसी की पत्ती तोड़ता है तो उसे दोष लगता है.

2) रोज तुलसी का पूजन करे. शास्त्रों में कहा गया है की तुलसी का पूजन रोज करना चाहिए. जो व्यक्ति शाम के वक़्त तुलसी के पास दिया जलाता है उस पर महलक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है.

3) तुलसी का पौधा वास्तु दोष से मुक्ति दिलाता है. यदि आपके घर के आँगन में तुलसी का पौधा है तो आपके घर के सारे वास्तु दोष मिट जायेंगे तथा घर में हमेशा धन लाभ के शुभ संकेत बने रहेंगे.

4) परिवार को बुरी नजर से बचाता है तुलसी का पौधा. यदि आपके घर में तुलसी का पौधा है तो आपके परिवार में किसी को भी बुरी नजर नहीं लगेगी. यह नकारात्मक उर्जा का भी नाश करता है.

5) तुलसी का सुखा पौधा कभी घर में न रखे. यदि पौधा सुखा गया है तो उसे किसी पवित्र नदी, तालाब या किसी कुँए में प्रवाहित कर देना चाहिए. सुखा तुलसी का पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है.

6) सुखा पौधा हटाने के बाद तुरंत नया तुलसी का पौधा लगाये. शास्त्रों के अनुसार तुलसी का स्वस्थ पौधा घर में आर्थिक बरकत बनाये रखता है. इसलिए तुलसी के पौधे को हमेशा सूखने से बचाना चाहिए.

7) तुलसी औषधि भी है. शास्त्रों में तुलसी को संजीवनी बूटी के सामान माना गया है. तुलसी में ऐसे कई गुण होते है जो बीमारियों की रोकथाम में सहायक होते है. तुलसी की सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और अनेक सुक्ष्म कीटों को नष्ट कर देती हैं.

8) रोज तुलसी का सेवन करे और स्वस्थ रहे. तुलसी की एक पत्ती आपको हमेशा सामान्य बुखार से बचाए रखेगी. तुलसी की पत्ती का सेवन हमारी शारीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाता है. ये मौसम परिवर्तन के साथ होने वाली स्वास्थ समस्याओ से भी शारीर की रक्षा करता हैं.

9) तुलसी की पत्ती का सेवन कभी चबा कर न करे. तुलसी की पत्ती में पारा तत्त्व विद्यमान होता है होता है जो दांतों के लिए हानिकारक होता है. अतः तुलसी की पत्ती का सेवन कभी चबा कर नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें सीधे निगल जाना चाहिए.

10) शिवलिंग और गणेश पूजन में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता. इस सम्बन्ध में पुराणों में दो कथाये प्रचलित हैं. पहली कथा के अनुसार भगवान शिव ने तुलसी  के पति दैत्यों के राजा शंखचूड़ का वध किया था. जिसके कारण शिवलिंग पूजन में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता है. दूसरी कथा के अनुसार एक बार तुलसी ने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा परन्तु गणेश जी ने तुलसी का प्रस्ताव ये कह कर के ठुकरा दिया की वे ब्रह्मचारी है. इससे रुष्ट होकर तुलसी ने उन्हें श्राप दिया की उनकी दो शादियाँ होगी. प्रतिक्रिया स्वरुप गणेश जी ने तुलसी को एक राक्षस से विवाह का श्राप दे दिया। इसलिए गणेश पूजन में भी तुलसी का  प्रयोग नहीं किया जाता।

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